परम शिव

जब ब्रह्मांड में शून्य के अलावा कुछ नहीं था तब भी शिव थे निराकार रूप में और महाशिवरात्रि के दिन ही एक ज्योतिर्लिंग के रूप में उन्होने अपना साकार रूप प्रकट किया और उसके बाद उसी प्रकाशित लिंग से त्रिदेव, त्रिदेवियाँ तथा अन्य परम शक्तियों की उत्पत्ति हुई. तो इस प्रकार जो शिव स्वयं अन्य परम शक्तियों के जनक हैं तो उनसे बड़कर और कौन है जो सर्वशक्तिमान कहला सके. उनका ना कोई रूप है, ना कोई आकार फिर भी वे जिस ज्योतिर्लिंग के रूप में हमें दर्शन देते हैं वही परमतम शक्ति है जो सत्य है जिसकी कोई तुलना नहीं, जिसके सब पराधीन हैं चाहे फिर वे ब्रह्मा, विष्णु ही क्यों ना हों. वैसे तो हम मानते हैं की भक्त अपनी भावना के अनुसार श्री नारायण अथवा ब्रह्मा जी को सर्वशक्तिमान मान सकता है लेकिन सत्य तो यही है की इन परम शक्तियों को भी जो उत्पन्न करने वाले हैं वे तो शिव ही हैं.